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चीनी मिल गबन कांड में छह पूर्व सरकारी अधिकारी दोषी, अदालत ने सुनाई सजा

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मुजफ्फरपुर – निगरानी अन्वेषण ब्यूरो द्वारा दर्ज बहुचर्चित चीनी गबन मामले में माननीय निगरानी (उत्तर बिहार) न्यायालय, मुजफ्फरपुर ने बिहार राज्य सुगर कॉरपोरेशन से जुड़े छह पूर्व अधिकारियों को दोषी करार देते हुए सजा सुनाई है। यह फैसला 10 दिसंबर 2025 को माननीय न्यायाधीश श्री दशरथ मिश्रा की अदालत द्वारा दिया गया, जबकि दंड की घोषणा 18 दिसंबर 2025 को की गई।
दोषी ठहराए गए अधिकारियों में बिहार राज्य सुगर कॉरपोरेशन लिमिटेड पटना के तत्कालीन प्रशासन प्रमुख श्री नंद कुमार सिंह, प्रबंध निदेशक के विशेष सहायक रहे श्री उमेश प्रसाद सिंह, लौरिया चीनी मिल के सुगर कोषांग लिपिक रहे श्री लालबाबू प्रसाद एवं श्री सुशील कुमार श्रीवास्तव, तत्कालीन लेखा पदाधिकारी श्री अजय कुमार श्रीवास्तव तथा चीनी बिक्री प्रभारी श्री धीरेन्द्र झा शामिल हैं। इन सभी को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 की धारा 13(2) सह पठित 13(1)(डी) तथा भारतीय दंड संहिता की धारा 467, 468, 471 एवं 120(बी) के तहत दोषी पाया गया।
मामले की जड़ सितंबर 1990 की उस घटना से जुड़ी है, जब पश्चिम चंपारण के लौरिया स्थित चीनी मिल से 997 बोरा चीनी का अवैध तरीके से गबन कर लिया गया था। आरोप है कि पदाधिकारियों ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए धोखाधड़ी और जालसाजी के माध्यम से सरकारी संपत्ति को हानि पहुंचाई। इस संबंध में तत्कालीन पुलिस उपाधीक्षक, निगरानी अन्वेषण ब्यूरो मुजफ्फरपुर श्री सदन कुमार श्रीवास्तव के लिखित प्रतिवेदन के आधार पर वर्ष 2000 में निगरानी थाना कांड संख्या–07/2000 दर्ज किया गया था।
अनुसंधान के क्रम में तत्कालीन अनुसंधानकर्ता पुलिस उपाधीक्षक श्री कुमार एकले द्वारा ठोस साक्ष्य संकलित कर समयबद्ध तरीके से आरोप-पत्र दाखिल किया गया। अभियोजन पक्ष की ओर से प्रभारी विशेष लोक अभियोजक निगरानी, मुजफ्फरपुर श्री कृष्णदेव साह ने प्रभावी पैरवी की, जिसके परिणामस्वरूप सभी छह अभियुक्तों को दोषी सिद्ध करने में सफलता मिली।
अदालत ने सजा सुनाते हुए नंद कुमार सिंह और उमेश प्रसाद सिंह को दो–दो वर्ष का सश्रम कारावास एवं 10–10 हजार रुपये का अर्थदंड लगाया है। जुर्माना अदा नहीं करने की स्थिति में उन्हें एक माह का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा। वहीं शेष चार अभियुक्तों—लालबाबू प्रसाद, सुशील कुमार श्रीवास्तव, अजय कुमार श्रीवास्तव और धीरेन्द्र झा—को तीन–तीन वर्ष का सश्रम कारावास तथा 25–25 हजार रुपये का अर्थदंड दिया गया है। अर्थदंड नहीं देने पर इन्हें भी एक माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
निगरानी अन्वेषण ब्यूरो के अनुसार वर्ष 2025 में अब तक भ्रष्टाचार से जुड़े कुल 30 मामलों में अदालत द्वारा सजा सुनाई जा चुकी है, जिनमें से 28 मामलों का फैसला विशेष न्यायाधीश निगरानी, पटना श्री मो. रूस्तम द्वारा दिया गया है। इसके पूर्व वर्ष 2024 में 18 मामलों में दोषियों को सजा हुई थी। आंकड़ों से स्पष्ट है कि इस वर्ष भ्रष्टाचार के मामलों में न्यायिक कार्रवाई में उल्लेखनीय तेजी आई है।
ब्यूरो ने कहा है कि सरकारी तंत्र में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए अभियोजन की कार्रवाई निरंतर जारी रहेगी। यह फैसला भ्रष्टाचार में लिप्त अधिकारियों के लिए कड़ा संदेश माना जा रहा है कि कानून से बच पाना संभव नहीं है, चाहे मामला कितना भी पुराना क्यों न हो।

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